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गुरुवार, 24 मार्च 2011

संत कबीरदास

पर नारी का राचना, ज्यूं लहसून की खान। कोने बैठे खाइये, परगट होय निदान।।संत कबीरदास जी कहते हैं कि पराई स्त्री के साथ प्रेम प्रसंग करना लहसून खाने के समान है। उसे चाहे कोने में बैठकर खाओ पर उसकी सुंगध दूर तक प्रकट होती है पर नारी पैनी छुरी, विरला बांचै कोय कबहुं छेड़ि न देखिये, हंसि हंसि खावे रोय।संत कबीर दास जी कहते हैं कि दूसरे की स्त्री को अपने लिये पैनी छुरी ही समझो। उससे तो कोई विरला ही बच पाता है। कभी पराई स्त्री से छेड़छाड़...
मंगलवार, 8 मार्च 2011

माँ तुझे नमन

माँ तुझे नमन आखिर  किसी   भी आदमी को कुछ भी बनाने के लिए एक माँ की जरुरत होती...
मंगलवार, 8 मार्च 2011

एक माँ

आदमी चाहे जो भी बन जाये लेकिन उसे जन्म लेन  के लिए एक  माँ की जरुरत होती है ......&nb...
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